Shiv Shankar भोलेनाथ गले में साँप क्यों धारण करते हैं ?

Shiv Shankar भोलेनाथ गले में साँप क्यों धारण करते हैं ?

Shiv Shankar भोलेनाथ गले में साँप क्यों धारण करते हैं ?-भगवान शिव को हम भगवान भोलेनाथ Bholenath के नाम से पुकारते हैं. उनका भोलापन इसी बात से दिखता हैं ,सागर मंथन के समय जब विष निकला था, तो सभी देव मिल कर भोलेनाथ की शरण में गए थे और उनसे आग्रह किया था कि ये विष देवताओं के हिस्से में आया हैं,अगर हम इसे पीते हैं,तो हम देवता नहीं रहेंगे.

तब भोलेनाथ ने इस विष का ग्रहण करके अपने कंठ में एकत्र कर लिया था.तभी से भगवन शिव को Neelkanth नीलकंठ के नाम भी लोग श्रद्धा पूर्वक लेते हैं.भगवान Shiv Shankar गले में सर्पों की माला पहनते हैं,मगर अपनी शांति का त्याग नहीं करते.

सर्पों की माला धारण करना अर्थात अनेक मुश्किलों को अपने ऊपर ले लेना.

जीवन है तो मुश्किलें तो आएँगी फर्क सिर्फ इतना है कि जो उन्हें हँस के सह लेता है वह शिव बन जाता है और जो उन्हें नहीं सह पाता वह शव बन जाता है.भगवान शिव शंकर के इस भोले स्वरुप से हम बहुत शिक्षा मिलती हैं,अगर तप करना हैं तो भगवान शिव से सीखो,अगर ईश्वर को पाना हैं तो भगवान शिव में लीन हो जाओ,और अगर मुक्ति पानी हैं तो भगवान शिव के भक्त बन जाओ.

Shiv Shankar

भगवान शिव अपने भक्तो पर परम कृपा करने वाले हैं .मनुष्य को अहंकार कि जगह भगवन शिव को देखना चाहिए कि देवो में देव महादेव का स्वाभाव सबसे निराला हैं.मुश्किलों का समाधान उससे मुकर जाना नहीं है,अपितु मुस्कुराकर उनका सामना करना है.कठिनाइयों से जूझते हुए आप अपने चेहरे पर मुस्कान लाने की हिम्मत जुटा पाते हैं, तो समझ लेना कि फिर आपकी शान्ति भंग करने की किसी में सामर्थ्य नहीं.

भगवान शिव के गले में सर्प हमें यह सन्देश देते हैं कि मुश्किलें तो किसी को भी नहीं छोड़ती बस आप अपनी हिम्मत और मुस्कान मत छोड़ना.

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