Hasth Rekha
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Know The Biggest Reason For Your Suffering-जाने अपने दुखों का सबसे बड़ा कारण चाणक्य नीति

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Know The Biggest Reason For Your Suffering-जाने अपने दुखों का सबसे बड़ा कारण चाणक्य नीति

Know The Biggest Reason For Your Suffering-जाने अपने दुखों का सबसे बड़ा कारण चाणक्य नीति-मानव अपना पूरा जीवन दुखों और कष्ट देने वाले बंधनों को दूर करने की कोशिश में ही लगा देता है. इसके बाद भी वो इन दुखों को कभी पूरी तरह से ख़तम नहीं कर पता हैं. भारत देश के महान ज्ञानी माने जाने वाले आचार्य चाणक्य ने अपनी चाणक्य नीति की किताब में एक श्लोक के माध्यम से मानव के दुखों के कारण का वर्णन किया है. आये समझते है इस श्लोक के के माध्यम से आचार्य चाणक्य हमे क्या सीखना चाहते हैं,जिससे हम अपने दुखों का मुख्य कारण जान सके.

Know The Biggest Reason For Your Suffering

आचार्य चाणक्य ने अपनी चाणक्य नीति में इस श्लोक का उल्लेख किया हैं.

श्लोक

बन्धाय विषयाऽऽसक्तं मुक्त्यै निर्विषयं मनः

मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः

चाणक्य नीति के इस श्लोक के माध्यम से मानव जाति को ये बताया हैं की,मनुष्य का मन ही समस्त बंधनों और दुखों का एक मात्र कारण है. वो कहते हैं कि मोक्ष-प्राप्ति के लिए ही भगवान जीवात्मा को मानव जीवन प्रदान करते हैं.लेकिन मनुष्य जीवन पाकर काम, क्रोध, लोभ, मद और मोह आदि में इतना खो जाता हैं,जिससे उसका इस धरती पर आने का मुख्य कारण उससे बहुत दूर छूट जाता हैं. इससे मनुष्य अपने वास्तविक लक्ष्य की ओर से भटक जाता है.जिससे उसको हमेशा दुखों का सामना करना पड़ता है जिसका एक मुख्य कारण मन ही हैं.

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मन ही मनुष्य को विषय-वासनाओं की ओर धकेलता हैं.उसे पाप-कर्म की ओर प्रेरित करता है.मन के वश में रहने वाला मनुष्य कभी भी जीवन और मौत के चक्र से कभी मुक्त नहीं हो सकता हैं.चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य को अपने मन को सभी विकारों से मुक्ति ले लेनी चाहिए और अपने मन की समस्त भावनाओ को अपने वश में करना चाहिए. ऐसा करने पर ही उसका परलोक में कल्याण संभव है.

आचार्य चाणक्य ने इस श्लोक में कहा है कि मनुष्य के बंधन और मोक्ष का कारण मन ही है. मन की भावनाओ में फंसा हुआ व्यक्ति कभी भी सुखी नहीं रह सकता हैं,यदि मनुष्य को सुखी रहना है तो,उसे अपने मन को पूरे वश में करना सीखना होगा. उससे संसार के बहुत सारे मोह पर अपने मन का नियंत्रण करना होगा.इतना सब करने के उपरांत ही उसके दुखों का निवारण संभव हैं.

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